श्रीगुरु उवाच


एक वर्षमें १२ मास होते हैं, प्रत्येक मासमें ४ सप्ताह होते हैं, प्रत्येक सप्ताहमें सात वार होते हैं, प्रत्येक वारमें २४ घण्टे होते हैं, प्रत्येक घण्टेमें ६० मिनिट होते हैं तथा प्रत्येक मिनिटमें ६० सेकण्ड होते हैं; अतः किसी एकाध सेकण्डके कालके सन्दर्भका उल्लेख करना हो तो ख्रिस्ताब्द २०१५ के जुलाई मासके तीसरे सप्ताहका गुरुवार, सवेरे १० बजकर १० मिनिट, १० सेकण्ड इस प्रकार करना होगा ।
वैसा ही युगके सन्दर्भमें है, कालकी गणना सत्य, त्रेता, द्वापर, कलि इन चार युगोंके आधारपर की जाती है । सत्य, त्रेता, द्वापर एवं कलि इन चार युगचक्रोंके प्रत्येक युग कालमें चार छोटे युगभी कालानुसार आते हैं । उस कालके छोटे चक्रमें कालके और अधिक छोटे चक्र होते हैं । इसप्रकार एकके अन्तर्गत दूसरे ऐसे ५ कलियुग अब तक हो चुके हैं । अब आगे छटे युगचक्रका सतयुग ख्रिस्ताब्द २०२३ में आएगा । उस वर्ष (१) कलियुग अन्तर्गत (२) कलियुग अन्तर्गत (३) कलियुग अन्तर्गत, (४) कलियुग अन्तर्गत (५) कलियुग अन्तर्गत (६) कलियुग अन्तर्गत सतयुग आएगा; ऐसा हम कहते हैं, जिसका अर्थ कई व्यक्तियोंके समझमें नहीं आता, वह उपर्युक्त उदाहरणसे समझना सुलभ होगा । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था



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