लडकोंकी शिक्षा अयोग्य रहनेका एकमात्र कारण यह नहीं कि वे अंग्रेजी माध्यमके विद्यालयमें शिक्षा ग्रहण करते हैं । घरमें होनेवाले झगडे तथा दैनिकमें एवं दूरदर्शन (टीवी) प्रणालीपर आनेवाले स्वैराचार, भ्रष्टाचार, जात्यन्धता, अपहरण, बलात्कार, हत्या इत्यादि समाचारोंसे भी उनपर अनिष्ट संस्कार होते हैं । भविष्यमें ऐसे समाचारोंका उनपर कुछ परिणाम तो होता ही है एवं कुछ कालावधिके पश्चात कुछ बच्चे स्वयं वैसा करते हैं ।
लडकोंपर अनिष्ट संस्कार न होने हेतु समाजमें अनिष्ट घटनाएं न हों, इसपर प्रधानतासे ध्यान देना होगा । इसमें एक पीढीकी अर्थात ३० वर्षोंकी कालावधि जाएगी । तदुपरान्तकी पीढीमें बालकपर बाल्यकालसे ही अच्छे संस्कार होनेके कारण ‘हिन्दू राष्ट्र’के लिए अपेक्षित ऐसी प्रथम पीढी सिद्ध होना आरम्भ होगा । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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