कोई व्यक्ति चिकित्सक (डॉक्टर) न हो तो रोगीपर उपाय नहीं करने दिया जाता; किन्तु जिनमें भक्तिभाव न हो उन्हें मन्दिरमें पुजारी, व्यवस्थापक नियुक्त किया जाता है ! हिन्दुराष्ट्रमें इस पापका फल उत्तरदायी शासकीय व्यक्तियोंको भोगना ही पडेगा ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
Leave a Reply