इच्छापूर्तिमें सर्वाधिक सुख वासनापूर्तिसे प्राप्त होता है । जब साधनामें प्रगति होकर आनन्दकी अनुभूति होने लगती है, तब वासनापूर्तिका सुख कितना निम्न स्तरका है, यह ज्ञात होता है तथा उसके प्रति नकारात्मकता आती है, कारण उस समय आनन्दकी अनुभूति लेना सम्भव नहीं होता ।
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