श्रीगुरु उवाच


‘निरक्षरोंका ऐसा कहना है कि सभी भाषाओंके अक्षर समान होते हैं अथवा सब कानून और औषधियां एक समान होती हैं’; जिसप्रकार ये मानना अज्ञानताका द्योतक है, उसीप्रकार ‘सर्वधर्म समभाव’ मानना भी है ।’ – परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

साभार : https://sanatanprabhat.org/



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution