अधोगतिको ले जानेवाला व्यक्तिस्वातन्त्र्य अर्थात स्वैराचार, अर्थात उच्छृंखलता !


विद्यालयके तथा महाविद्यालयके विद्यार्थियोंको व्यक्तिस्वातन्त्र्यके नामपर किसी भी प्रकारके आचरण करनेकी सम्मति नहीं दी जाती, उसीप्रकार अपराधियोंको अपराध करनेके लिए, मार्गपर जैसे चाहें वैसे वाहन चलानेका व्यक्तिस्वातन्त्र्य नहीं होता । जो वैद्य न हो, उसे औषधि देनेकी सम्मति नहीं होती । इसका अर्थ यह कि समाजके सभी क्षेत्रोंमें व्यक्तिस्वातन्त्र्यकी सम्मति नहीं होती । ऐसा होनेपर भी व्यक्तिस्वातन्त्र्यके नामपर समाजमें स्वेच्छासे किसी भी प्रकारका वर्तन करनेकी सम्मति मांगनेवालेको या अनुचित क्यों नहीं लगता ? – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था



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