छोटे बालक क्रीडा करते हुए आपसमें लडते हैं, वयस्क मानव ऐहिक विषयोंपर तथा राजनेता सत्ताके लिए लडते हैं । छोटे बालक बडे होनेपर क्रीडाके सम्बन्धमें नहीं लडते, कारण उन्हें वह महत्वपूर्ण नहीं लगता । उसीप्रकार साधनामें प्रगति होनेपर सत्ता तो क्या, किसी भी वस्तुके लिए साधक नहीं लडते, कारण उन्हें मायाकी कोई भी वस्तु महत्वपूर्ण नहीं लगती । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
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