श्री गुरु उवाच


अपने पदके अहंकारमें लिप्त राजनेता सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थात शासकीय कर्मचारी, अधिकारी एवं पुलिस, इनके माध्यमसे समाज, राष्ट्र एवं धर्मविरोधी कृति करते हैं । इसलिए व्यक्ति एवं समाजपर अन्याय होता है; फलस्वरूप राष्ट्र और धर्मकी अत्यधिक हानि  होती है । अनेक बार शासकीय कर्मचारी, अधिकारी एवं पुलिस, यदि इन्हें राष्ट्र एवं धर्म-विरोधी कृति करनेकी इच्छा नहीं होती, तब भी उन्हें राजनेताओंके दबावमें आकर ऐसा करना पडता है । ऐसे प्रसंगोंमें शासकीय कर्मचारी, अधिकारी एवं पुलिसद्वारा पापकर्म नहीं घटित होता, यह ध्यान रखें । राजनेताओं समान दुर्जन प्रवृत्ति रखनेपर, उनके पापकर्ममें सहभागी होनेसे वे भी पापके भागीदार होते हैं । इतना ही नहीं, उनकी आध्यात्मिक हानिके साथ ही पारलौकिक अधःपतन होता है । इस पतनको रोकने हेतु आवश्यकता पडनेपर स्थानांतरण हुआ तो भी कोई बात नहीं, पदोन्नति नहीं मिली, तो भी कोई बात नहीं; परंतु अयोग्य कृति नहीं करेंगे, इस प्रकारका मनोबल रखना चाहिए । ऐसा मनोबल एवं दृष्टिकोण रखनेसे अन्य सहयोगियोंको प्रेरणा मिलती है और राजनेताओंका मनोबल टूटता है । चाकरी(नौकरी) करते समय व्यक्तिद्वारा समाज, राष्ट्र और धर्म विरोधी कृति न होनेसे उनकी कर्मयोग अनुसार साधना होती है और इस कारण उन्हें मानसिक शांतिके साथ ही ईश्वरका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : https://sanatanprabhat.org/



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