श्रीगुरु उवाच


दूसरोंको दोष न देकर अपने दोष दूर करें !
कुछ साधकोंको लगता है कि यह साधक मेरे साथ बातें नहीं करता है, अन्य व्यक्तियोंसे अच्छेसे बोलता है; परन्तु उन्हें इसका बोध होना चाहिये कि कोई सबसे अच्छेसे बोलता है, केवल मुझसे नहीं बोलता अर्थात मुझमें ही कोई त्रुटि है, उस दोषको दूर करनेपर वह आपसे भी अन्य व्यक्तियोंके समान बातें करेगा । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले(११.७.२०१४)


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