परम पूज्य डॉ. आठवले एवं अन्योंके लेखनमें भेद
मेरा लेखन बहुधा आध्यात्मिक भाषामें होता है, उसमें क्या सीख सकते हैं, यह अधिक प्रमाणमें होता है । उसमें भावना या भावका स्तर अल्प होता है; अतः अनेक व्यक्तियोंद्वारा उसे पढना कठिन होता है । इसके विपरीत अन्योंके लेख भावना या भावके स्तरपर एवं सरल भाषामें होते हैं; इसलिए वाचक उसे शीघ्र समझ पाते हैं । ( ३१.१२.२०१३) –
परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले