श्रीगुरु उवाच


Shankercharyहास्यास्पद पत्रकार एवं उन्हें भेजनेवाले समाचारपत्र !
किसी वकीलका साक्षात्कार करना हो तो कानूनका, आधुनिक चिकीत्सकके साक्षात्कारके लिये चिकित्साशास्त्रका थोडा बहुत ज्ञान होना आवश्यक है । इस तथ्यसे अज्ञात समाचार पत्रोंके पत्रकार कैसे हास्यास्पद प्रश्न करते हैं, यह  पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ-पुरी पीठाधीश्‍वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंदसरस्वती महाराजके पत्रकार परिषदमें सामने आया । सरकारी पत्रकारोंको भेजनेवाले समाचारपत्र केवल कर्मकांड हेतू (मात्र नियम पूर्ती हेतु) अध्यात्म विषयसे अनभिज्ञ किसी भी पत्रकारको किस प्रकार  भेजते हैं, इसके अनेक उदाहरण  मुंबई, गोवा और  पुणेमें हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंद सरस्वती महाराजके पत्रकार परिषदमें देखनेको मिला । उसमेंसे एक
उदाहरण यहां प्रस्तुत है –
एक पत्रकारने जगद्गुरुसे पूछा ,हिंदुओंकी स्थितिके सुधार हेतू आप
क्या कर रहें हैं ? उस पत्रकारको यह तक ज्ञात नहीं कि जगद्गुरु एवं संत, इनका
मुख्य कार्य सूक्ष्मसे होता है । यह समझनेके लिये और उनका अधिकार समझनेके
लिये पत्रकारको स्वयं अध्यात्मके सूक्ष्म पक्षकी समझ होना आवश्यक है । साधना करनेवालेको ही
सूक्ष्मका ज्ञान होता है । –

-परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले (२८.११.२०१३)



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