कोई बालक ‘माता-पिता कौन ?’ इसकी खोज करनेका प्रयत्न करे, तथा उत्तर न मिलनेपर, ‘माता-पिता होते ही नहीं’, यह कथन जितना हास्यास्पद है, उतना ही बुद्धिप्रामाण्यवादियोंका ‘ईश्वर नहीं हैं’, यह कहना हास्यास्पद है । -परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
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