श्रीगुरु उवाच


जिन साधकोंकी साधना ईश्वरप्राप्ति हेतु होती है, उन्हें किसी संस्थाकी, संगठनकी या पक्षके किसी पदकी, उसी प्रकार लोकप्रतिनिधिपद, मंत्रीपद या प्रधानमंत्री पद इसकी आसक्ति होगी क्या ? –परात्परगुरु  डॉ. जयंत आठवले (२६.१२.२०१४)



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