हिन्दुओं ! परिवर्तन लानेके लिए पुलिसके डंडोंसे न डरते हुए पुलिसके अत्याचारोंके विरुद्ध उनके वरिष्ठोंसे परिवाद (शिकायत) करें !
एक घटनामें पुलिसने एक हिन्दू एवं उसके कुटुंबियोंपर अत्याचार किए । इस घटनापर पुलिसमें प्राथमिकी प्रविष्ट करानेपर भी (FIR) पुलिसने अत्याचारी पुलिसवालोंके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की । पुलिसके इस अनैतिक वर्तनके विरोधमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियोंके पास परिवाद करना आवश्यक था; किन्तु ऐसा करनेसे मनमें दुर्भावना रखकर पुलिस हमपर पुनः अत्याचार करेगी, यह सोचकर उन्होंने वरिष्ठोंसे परिवाद करना टाल दिया । पुलिसद्वारा इसप्रकार सामान्य जनताको कष्ट देनेकी अनेक घटनाएं हैं, इसलिए स्वाभाविक है कि सामान्य जनता पुलिसके विरुद्ध परिवाद करनेका साहस नहीं जुटा पाती है । तथापि जनताने पुलिसके अत्याचार इसीप्रकार सहन किए तो पुलिसवालोंका दुःसाहस दिनों-दिन बढता जाएगा तथा सामान्य जनताके लिए निर्भय होकर जीना भी कठिन होगा । इसलिए जनताको ऐसी घटनाओंमें थोडा साहस दिखाते हुए अत्याचारी पुलिसवालोंके विरुद्ध परिवाद कर व्यवस्था-परिवर्तनके कार्यको आरम्भ करना आवश्यक है । ऐसी परिस्थितिमें हिन्दुत्ववादियोंको अत्याचारग्रस्त व्यक्तिका साथ देकर अत्याचारी पुलिसवालोंके विरुद्ध लडनेमें सहायता करना चाहिए तथा समय आनेपर स्वयं ही प्रतिकार करनेकी सिद्धता (तैयारी) रखनी चाहिए । -परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले