श्रीगुरु उवाच


‘बुद्धिप्रामाण्यवादियोंके बहकावेमें आकर बुद्धिके परे जो धर्म है, उसे छोडनेसे ही जगतके अन्य सभी धर्मियोंकी अपेक्षा हिन्दुओंकी अधिक दयनीय स्थिति हुई है ।-परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (२७.१२.२०१४)

(मुसलमान और ईसाई अपने धर्मगुरुओंके आदेशको अंतिम आदेश मानकर उनका पालन करते हैं वहीं मैकालेकी शिक्षण पद्धतिमें शिक्षित अधिकांश हिन्दू नास्तिक और निधर्मी बुद्धिवादके प्रपंचमें सरलतासे फंस जाते हैं और उनके अदूरदर्शी, अर्धसत्य एवं अवैज्ञानिक वक्तव्यको सत्य मानने लगते हैं, यही बुद्धिभ्रष्टता, हिन्दुओंकी अधोगतिका मूल कारण है; अतः हिन्दू राष्ट्रमें इस निधर्मी शिक्षण पद्धतिको जडसे नष्ट कर, वैदिक शिक्षण प्रणालीको भारतमें पुनर्स्थापित किया जाएगा | – तनुजा ठाकुर



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