मुखके सौन्दर्यसे अधिक ईश्वरविषयी भाव महत्त्वपूर्ण !
पहले स्त्रियां साधना करती थीं; इसलिए उनके मुखपर सात्त्विकता हुआ करता थी; अतः उन्हें कृत्रिम सौन्दर्यकी आवश्यकता नहीं होती थी । इससे ज्ञात होता है कि, पूर्वकालमें सौंदर्यवर्धनालय (ब्यूटी पार्लर) क्यों नहीं हुआ करते थे । आज सभीने साधना छोड दी है; इसलिए उन्हें सुन्दर दिखनेके लिए पाश्चात्योंके समान सौंदर्यवर्धनालयोंकी आवश्यकता होती है ।-परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले