श्री गुरु उवाच


ब्राह्मणो ! आरक्षणके कारण ‘नौकरी’ नहीं मिलती, यह सोच दुःखी होनेके स्थानपर पौरोहित्य सीखें तथा व्यष्टि एवं समष्टि साधनाकर स्वयंका तथा अन्योंका कल्याण करें !
आरक्षणके कारण ब्राह्मणोंको नौकरी नहीं मिलती, इसका दुःख करनेके स्थानपर उसका लाभ प्राप्त करने हेतु वे पौरोहित्य सीखें ! अन्य कोई भी व्यवसाय मनःपूर्वक करनेसे साधना नहीं होती; किन्तु पौरोहित्य, साधना समझकर करनेसे स्वयंकी व्यष्टि साधना होगी और उसके साथ ही समाजको साधना मार्गपर लाने हेतु समष्टि साधना भी हो सकेगी । इन दोनोंके कारण साधनामें शीघ्र प्रगति होगी । – परात्पर गुरु डॉ जयन्त आठवले



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