साधारण व्यक्ति स्वेच्छाकी तृप्तिको प्रधानता देता है, साधक परेच्छा अनुसार वर्तन करता है और सन्त मात्र ईश्वरेच्छा अनुसार आचरण करते हैं ।
-परात्पर गुरु डॉ जयन्त आठवले
भावार्थ : साधारण व्यक्ति स्वेच्छा अनुसार वर्तन करता है अर्थात उसके लिए स्वयंकी इच्छा पूर्ति अधिक महत्त्व रखता है, साधक परेच्छा अनुसार वर्तन करता है अर्थात दूसरोंकी इच्छाको प्रधानता देते हुए वर्तन करता है और यह वह इसलिए कर पाता है क्योंकि उसमें त्यागकी भावना होती है और सन्त इश्वरेच्छा अनुसार वर्तन करते हैं; क्योंकि उनके लिए स्वेच्छा और परेच्छा दोनोंसे ऊपर ईश्वरेच्छा होती है -तनुजा ठाकुर
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