श्रीगुरु उवाच : प्रार्थनाके चरण


अहंको न्यून करने हेतु प्रार्थना आवश्यक होता है | प्रार्थना करते समय भी अल्प प्रमाणमें स्वेच्छा रहती है | यदि पूर्ण विश्वास हेतु प्रार्थना की तब भी उसमें स्वेच्छा होती है |

आगे ईश्वरेच्छापर सब कुछ समर्पित करनेपर प्रार्थनाके स्थानपर निर्विचार अवस्था और शांतिकी अनुभूति होने लगती है |  -परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution