श्रीगुरु उवाच


janayaविषयको समझने हेतु बौद्धिक स्तरकी अपेक्षा आध्यात्मिक स्तर अधिक श्रेष्ठ !

सूक्ष्म समझनेमें आनेपर, प्रारम्भिक कालमें यदि कोई आगसे घिरा दिखाई देता या पता चलता तो आग जलसे बुझ जाती है, यह बुद्धिको ज्ञात होनेके कारण आप तत्त्वसे संबन्धित जल देवताका जप करनेके लिए कहता था | जब आगे और अध्यात्मका अभ्यास हुआ तो ज्ञात हुआ कि आप तत्त्वकी अपेक्षा अग्नि उत्पन्न करनेवाला तेज तत्त्व अधिक प्रभावशाली है | इसलिए जलदेवताका जप परिणामकारक नहीं होगा | अतः तेज तत्त्वसे अधिक सूक्ष्म तत्त्व, अर्थात वायुतत्त्व या आकाशतत्त्वसे संबन्धित देवताका नामजप बताना आरंभ किया और उसका लाभ भी दिखने लगा – परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले | (चैत्र शुक्ल पक्ष १, कलियुग वर्ष ५११५ (११.४.२०१३))

भावार्थ : पंचमहाभूत अर्थात पृथ्वी, आप, तेज, वायु एवं आकाश हैं | पृथ्वीकी अपेक्षा जल तत्त्व अधिक सूक्ष्म है और उसी प्रकार आप तत्त्वकी अपेक्षा तेज, तेज तत्त्वकी अपेक्षा वायु एवं वायु तत्त्वकी अपेक्षा आकाश तत्त्व अधिक सूक्ष्म होता है | यहांपर इन्हीं पंचतत्त्वके सूक्ष्म पक्ष संबन्धित प्रयोगके बारेमें श्रीगुरु बता रहे हैं | और बौद्धिक स्तरकी अपेक्षा आध्यात्मिक स्तरका विश्लेषण अधिक सटीक और सूक्ष्म होता है और उसका सूक्ष्म प्रभाव भी अधिक पडता है, इस सिद्धांतको वे यहां बताना चाहते हैं  |-तनुजा ठाकुर  



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