श्रीगुरु उवाच


नामजपमें वैखरी वाणीका लाभ

सामान्य रूपसे हम जो नित्य बोलते हैं, उस वाणीको वैखरी वाणी कहते हैं । साधनामें नामजप करते हुए वैखरीसे मध्यमा, पश्यंती एवं परा वाणीमें जप करते हुए आगे जाना होता है । यह साध्य करना आरम्भमें कठिन होता है; अतः वैखरी वाणीमें जप करनेसे जप सुनाई देता है; इसलिए जपपर मन एकाग्र होनेमें सहायता होती है । इससे आगेकी वाणीमें जप करना सुलभ होता है ।-परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले (२.३.२०१४)



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