१. धर्मपरिवर्तन करनेवाले हिन्दुओं इससे होनेवाली हानि समझ लो !
अ. धर्मपरिवर्तन करना यह स्वेच्छा है । स्वेच्छा हमें ईश्वरसे दूर ले जाती है ।
आ. मानसिकदृष्टया किसीकी समझानेपर या आर्थिक अथवा अन्य लाभ हेतु लाखों हिन्दू धर्म परिवर्तन करते हैं । उन्हें यह ज्ञात नहीं होता कि सर्व धर्मोंमें केवल हिन्दू धर्म ही आध्यात्मिक प्रगतिद्वारा मोक्षतक ले जा सकता है । अनेक जन्मोंके पुण्योंसे ही ऐसे धर्ममें जन्म मिलता है । धर्मपरिवर्तन करनेसे मोक्षप्राप्तिकी अमूल्य संधि लुप्त हो जाती है; परिणामस्वरूप पुनः अनेक जन्म लेनेके पश्चात् कभी मानव जन्म मिलता है। ऐसे सहस्रों मानव जन्मोंमें थोडे बहुत प्रयत्न करनेके पश्चात् ही पुनः कभी हिन्दू धर्ममें जन्म मिलता है तथा उसके पश्चात् ही साधनाकी खरी संधि प्राप्त होती है ।
इ. अपने साथ अपने कुटुम्बियोंका भी धर्म परिवर्तन करवानेके कारण पाप लगता है ।
ई. परधर्म स्वीकारनेसे (स्व) धर्मकी अर्थात् ईश्वरकी सहायता नहीं मिलती है ।
उ. धर्म परिवर्तनसे कुलोपासना बन्द होजाती है; परिणामस्वरुप कुलदेवता रुष्ट हो जाते हैं तथा उनके माध्यमसे कुलके उद्धारका मार्ग बन्द हो जाता है ।
ऊ. स्वधर्माचरण बन्द होनेसे उस मार्गसे होनेवाली आध्यात्मिक प्रगति बन्द हो जाती है ।
ए. स्वधर्म छोड परधर्मकी साधना करनेसे आध्यात्मिक स्तर घटता है ।
ऐ. वडाला महादेव (श्रीरामपुर, जि. नगर, महाराष्ट्र) स्थित महायोगी गुरुदेव डॉ.काटेस्वामीजीके अनुसार एक बार हिन्दू धर्मका त्याग करनेपर पुनः इस जन्ममें आनेके लिए ३०० जन्म लेने पडते हैं ।
ओ. धर्मान्तरण करनेसे परधर्म स्वीकारने विषयी अन्योंके सामने अनजानेही एक आदर्श प्रस्तुत होता है । इसप्रकार अन्योंको धर्मसे दूर ले जानेपर धर्मद्रोहका पाप लगता है ।
२. दूसरोंका धर्म परिवर्तन करवानेवालों, तुम्हारी होनेवाली हानिको समझो ! : दूसरोंका धर्म परिवर्तन करवानेवालोंको भी दूसरोंको अधोगतिको ले जानेके कारण पाप लगता है ।-परात्परगुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (१६.३.२०१५)