श्रीगुरु उवाच


ज्ञानयोगकी तीव्र जिज्ञासा भक्तियोगकी तडपके समान होती है । कर्मयोगानुसार, ज्ञानयोगकी जिज्ञासाका कर्मफल प्राप्त होता है, अर्थात् उसे ज्ञान मिलता है, तो भक्तियोगमें भक्तकी तडपसे उसे ईश्वरप्राप्ति होती है । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



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