श्रीगुरु उवाच


जिसप्रकार शिवपिण्डीपर जलधारा सतत गिरती रहती है, उसीप्रकार साधकका सतत अनुसन्धान होना चाहिए । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (२९.४.२०१५)



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