श्रीगुरु उवाच


धन साध्य नहीं; अपितु साधन है !
धन साध्य नहीं, इसका अर्थ है धन प्राप्त होना, यह साध्य अर्थात् ध्येय नहीं; अपितु साधन है । धन, त्यागरूपी साधना करनेका अवसर देनेका एक माध्यम है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



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