विद्वानों समान अनर्गल बोलनेवाले आजके तथाकथित बुद्धिप्रामाण्यवादी !
गीता (अध्याय २, श्लो्क ११) भगवान श्रीकृष्णने अर्जुनसे कहा, प्रज्ञावादांश्च भाषसे । अर्थात् तुम विद्वानों समान (मूर्खोंसा) युक्तिवाद करते हो । आजके बुद्धिप्रामाण्यवादियोंकी बातें सुनकर इसका स्मरण होता है; क्योंकि वे किसी भी अभ्यास अथवा अनुभवके बिना किसी भी विषयपर अपना दृढ मत व्यक्त कर नहीं रुकते अपितु उस विषयपर लेखन कर एवं दूरचित्रवाहिनियोंपर अनर्गल बोलकर समाजको भ्रमित करते हैं । इनमें बुद्धिप्रामाण्यवादीयोंके साथ देकर उनके लेखोंको प्रकाशित करनेवाले और उन्हें दूरचित्रवाहिनियोंके कार्यक्रमोंमे बुलानेवाले भी उत्तरदायी होते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (१०.७.२०१४)
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