श्रीगुरु उवाच


जीवनका अर्थ है, कुछ वर्षोंके लिए साथ आना तथा तत्पश्चात सदैवके लिए दूर जाना !

१. पुत्र जन्म लेनेके पश्चात चाकरी (नौकरी) लगनेतक साथमें रहता है; परन्तु तत्पश्चात जिस स्थानपर उसकी चाकरी (नौकरी) हो, वहां चला जाता है ।

२. पुत्री जन्मके बाद विवाहतक साथ रहती है; तत्पश्चात ससुराल जाती है ।

३. नौकरी करते समय सहकर्मीके साथ कुछ वर्ष होते हैं; परन्तु पुनः सेवानिवृत्तिके पश्चात किसीसे भी भेंट नहीं होती ।

४. पति-पत्नी कुछ वर्ष साथ होते हैं; तत्पश्चात पुनः एककी पहले मृत्यु होती है ।

इसका तात्पर्य यह है कि जीवनका अर्थ है कुछ वर्षोंके लिए साथ आना तथा तत्पश्चात सदैवके लिए दूर जाना ! इतना ही नहीं, जीवनमें दुःखके अनेक प्रसंग घटित होते हैं एवं यह जन्म-जन्मांतर चलता रहता है । इससे छूटनेका मार्ग अर्थात साधना !

-परात्पर गुरु डॉ . जयन्त आठवले (१५.१.२०१५)



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