पालको, बाएं हाथसे लिखनेवाले बालकोंको दाहिने हाथसे लिखनेकी प्रवृत्ति निर्माण हो, इसहेतु उनपर क्रोध करनेकी अपेक्षा, उन्हें स्वयंसूचना देनेको कहो !
बाएं हाथसे नहीं, दाहिने हाथसे लिखना चाहिए । बच्चे बचपनमें नूतन कार्य तुरन्त आत्मसात कर लेते हैं । बडे होनेपर आत्मसात करना कठिन होता है । जब ये बालक बडे होकर समाजमें जाएंगे, तब उन्हें उनके बाएं हाथसे लिखनेके कारण विविध अडचने आएंगी ! इतना ही नहीं साधनामें भी अडचनें आएंगी ! बाएं हाथसे लिखनेवाले बालकोंको दाहिने हाथसे लिखनेको कहनेपर वे चिडचिड करें तो उन्हें उस सन्दर्भमें स्वयंसूचना देनेको कहें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले संस्थापक, सनातन संस्था
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