श्रीगुरू उवाच


भारतीय जनता लोकतन्त्रके उपयुक्त है क्या ?
१. राष्ट्र तथा धर्मसे जिन्हें कोई लेना -देना नहीं, ऐसे व्यक्ति ५००-१००० रुपयोंके लोभमें देशको पतनकी ओर ले जानेवालोंका वर्षोंसे चुनाव करते आ रहे हैं, यह है, भारतीय लोकतन्त्रका प्रमुख लक्षण !
२. आधुनिक वैद्य (डॉक्टर), अधिवक्ता, अभियन्ता, प्राध्यापक इत्यादिके सङ्गठनोंके चुनावमें जनताका मताधिकार नहीं होता; परन्तु जनता तथा राष्ट्रके जन्म-मरण सम्बन्धित उनके राष्ट्रीय चुनावोंमें अनपढको भी चुनावका अधिकार है । इससे हास्यास्पद तथा विनाशकारी जगमें और कुछ होगा क्या ?  – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution