गीता सार


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥ – श्रीमदभगवद्गीता (३: २१)
अर्थ : श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य पुरुष भी वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, समस्त मनुष्य-समुदाय उसीके अनुसार बरतने लग जाता है |
भावार्थ : धर्मकी एक परिभाषा यह भी है कि जिस मार्गपर श्रेष्ठ पुरुष चले उसका अनुसरण करना धर्म है | अतः श्रेष्ठ व्यक्तिका यह नैतिक उत्तरदायितत्व है कि उसके प्रत्येक कर्म आदर्श हो | जो भी संत समष्टिको साधना या अध्यात्म बताते हैं उन्हें भी अपने बाह्य आचरणपर अत्यधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि समाज एक नकलची बंदर समान उसके कृतिका भावार्थ न समझ कर उनका अनुकरण करते हैं | आज समाजमें अत्यधिक व्याभिचार क्यों है ? क्योंकि समाजके आदर्श परिवर्तित हो गए हैं | आजकी युवा पीढीके आदर्श रज एवं तम प्रधान सिने नायक एवं नायिकाएं है या क्रिकेट खिलाड़ी या भ्रष्ट राजनेता | इनमें से कोई भी सामजके आदर्श बनने लायक नहीं है | जब युवा मन इन्हें अनैतिक कर्तव्य करते देखता है और तब भी समाज उन्हें सम्मान देता है तो युवा मनको लगता है कि उसके आदर्श योग्य आचरण कर रहे हैं और वे उनका अनुसरण कर पथभ्रष्ट हो जाते हैं | अतः अपने आदर्श चुनते समय अपने विवेकका उपयोग करना चाहिए | आज अधिकांश स्त्री पाश्चात्य संस्कृति अनुसार वस्त्र धारण करने लगी हैं, अंग प्रदर्शन करनेवाले वस्त्र पहनने लगी हैं, युवा पुरुष, नायकको सिनेमामें देख व्यसन करते हैं, स्त्रियोंको छेडते हैं, उन्हें वासनायुक्त दृष्टिसे देखते हैं, भ्रष्ट नेताको दंड न मिलता देख साधारण व्यक्ति भी अपने स्तरपर भ्रष्टाचार करता है या घूस देकर उसे बढावा देता है | क्रिकेट खिलाड़ी मैच फिक्सिंग कर भी बडे-बडे कार्यक्रममें मुख्य अतिथि बनकर आते हैं | अनेक सन्यासी भी गेरुआ वस्त्र धारण कर भोगमें लिप्त रहते हैं | खरे अर्थमें आज समाजमें आदर्शोंकी (रोले मोडेल्स ) कमी हो गयी है | श्रेष्ठ व्यक्ति किसे कहते हैं यह समाज भूल गया है, आज अनैतिकताके साथ सम्झौता कर अनैतिक कर्तव्य करनेके पश्चात किसीको न डर लगता है और ना ही उसका अन्तर्मन उसे झकझोरता है | स्थिति इतनी भयावह है कि आज आदर्श किसे कहते है इसकी परिभाषा ही परिवर्तित हो गयी है अतः समाजका व्यष्टि और समष्टि जीवन त्रस्त हो गया है | अतः समाजमें जो भी व्यक्ति जिस क्षेत्रके विशेषज्ञ है और समाज उन्हें आदर्शके रूपमें देखते हैं, उनका नैतिक उत्तरदायित्व है कि वे आदर्श वर्तन करें अन्यथा ईश्वरीय विधान अनुसार वे अधिक दंडके पात्र होंगे |

-तनुजा ठाकुर

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution