साम्प्रदायिक भक्त, अपना सम्प्रदाय नहीं परिवर्तित करते हैं, उसीप्रकार किसी विशिष्ट देवताके भक्त, उपास्यदेवता नहीं परिवर्तित करते, अर्थात अन्य देवताकी उपासना करना आरम्भ नहीं करते हैं । ऐसी एकनिष्ठता राजनेताओंमें दिखाई नहीं देती, वे पक्ष परिवर्तित करते हैं; क्योंकि वे रजप्रधान एवं चंचल चित्तवाले होते हैं । इसके विपरीत साम्प्रदायिक साधक तथा भक्त सत्त्वप्रधान होते हैं । सत्त्वप्रधान व्यक्तियोंके हाथमें ही सत्ता स्थिर रहती है; इसलिए हिन्दू राष्ट्र, अर्थात रामराज्य स्थापित करनेके लिए प्रयत्नोंकी पराकाष्ठा करनी है । – – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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