सभी एक ही प्रार्थना करें ! यह अयोग्य है !
विविध पंथोंमें तथा सम्प्रदायोंमें सभीके द्वारा की जानेवाली प्रार्थनाएं एक समान होती हैं । यह किस प्रकार अयोग्य है ?, इसे व्यावहारिक उदाहरणसे समझ लेते हैं । संतोंके पास जानेवाले अनेक लोग उन्हें अपनी व्यावहारिक इच्छाओंके सन्दर्भमें पूछते हैं तथा उसी सन्दर्भमें प्रार्थना करते हैं, जो सभीकी भिन्न भिन्न होती हैं । साधनामें भी प्रत्येकका साधना मार्ग, स्तर इत्यादि भिन्न-भिन्न होते हैं; अतः सभीका एक ही प्रार्थना करना अयोग्य होता है । हिन्दू धर्मका वैशिष्ट्य यह है कि इसमें सहस्रों प्रार्थनाएं दी गई हैं । प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न देवताओंसे प्रार्थना कर सकता है । – परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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