मुस्लिम और ईसाई अपने-अपने इस्लाम और ईसाई धर्मकी महत्व समझते हैं । इसीलिये वे अनेक शतकोंसे सम्पूर्ण जगतके इस्लामीकरण एवं ईसाईकरणके लिये अथक प्रयास कर रहे हैं । जो हिन्दु स्वयंको बुद्धिमान,पाश्चात्य , बुद्धिवादी और सुधारक मानते हैं, उन्होंने हिन्दु धर्मका अभ्यास नहीं किया होता है और साधना भी की नहीं है; इसलिए उन्हें हिन्दू धर्मकी विशेषता एवं महत्वका ज्ञान नहीं । यह सत्य है कि जगतके किसी भी कोनेमें ईश्वरप्राप्तिकी (आत्मज्ञानकी ) इच्छा रखनेवाले व्यक्ति ज्ञानप्राप्ति एवं मार्गदर्शन हेतु भारत आते हैं । और चिराग तले अंधेरा, इस तथ्यको हमारे स्वयंसिद्ध सुधारक (जो स्वयं हिन्दू धर्मद्रोही हैं) सिद्ध करते हैं । ये ही हिन्दु राष्ट्रकी स्थापनाके प्रमुख रोडे हैं । – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले
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