जुलाई १०, २०१८
पाकिस्तानके प्रथम सिख पुलिस अधिकारी गुलाब सिंहके साथ कुकृत्यका प्रकरण सामने आया है । गुलाब सिंहका आक्षेप है कि उन्हें लाहौर स्थित उनके घरसे बलपूर्वक बाहर निकाला गया, उनकी पगडी खींची गई, कुटुम्बको धक्के देकर घरसे बाहरकर, घरपर ताला लगा दिया है । गुलाब सिंहने अपने साथ हुई कुकृत्यका वीडियो जारीकर पाकिस्तानमें सिखोंके साथ हो रहे अत्याचारका साक्ष्य दिया है । गुलाब सिंहका कहना है कि वह १९४७ से लाहौरके डेरा चहल क्षेत्रमें रह रहे हैं ।
गुलाब सिंहने वीडियो में कहा, ‘मैं गुलाब सिंह ट्रैफिक वॉर्डन, मैं पाकिस्तानका प्रथम सिख पुलिस अधिकारी हूं । मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसा चोरों-डाकुओंके साथ किया जाता है ! मुझे मेरे घरसे घसीटकर बाहर निकाला गया और मेरे घरमें ताले लगा दिए गए ! तारिक वजीर जोकि अडिशनल सेक्रटरी है और तारा सिंह जोकि पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबन्धक समितिका भूतपूर्व प्रधान है, उन्होंने कुछ लोगोंको प्रसन्न करनेके लिए यह कार्य किया है । न्यायालयमें मेरे अभियोग भी चल रहे हैं । इस गांवमें केवल मुझे ही लक्ष्य बनाया जा रहा है । आप देख सकते हैं मेरे सिरपर पगडी भी नहीं है, वे मेरी पगडी भी छीनकर ले गए और उन्होंने मेरे बाल भी खींचे हैं !’
गुलाब सिंहने कहा, ‘मैं आप लोगोंसे अनुरोध करता हूं कि मेरी ‘अधिक से अधिक’ सहायता करें और इस वीडियोको भी साझा करें और पूरे विश्वको यह बताएं कि पाकिस्तानमें सिखोंके साथ क्या अत्याचार हो रहा है ।’
इसके अतिरिक्त एक और वीडियो भी गुलाब सिंहने सांझा किया है, जिसमें वह अपने कुटुम्बके साथ अपने घरके बाहर खडे हैं और लोगोंसे सहायता मांग रहे हैं । इसमें गुलाब सिंहके साथ उनकी पत्नी और उनके तीन बच्चे भी दिख रहे हैं । वीडियो गुलाब सिंह यह कहते दिख रहे है, ‘ये मेरा कुटुम्ब है, जो कि मेरे साथ खडा है । हमें घरसे बाहर निकाल दिया है, उन लोगोंने मेरे बाल खींचे, मेरे बाल भी खुले हैं । उन्होंने मेरी पगडी गिरा दी, मेरे साथ बहुत दुर्व्यवहार किया ! मैं सिख संगतसे विनती करता हूं, मेरे केसके (बालों) अपमानको लेकर शासनसे प्रश्न किए जाएं कि ऐसा क्यों हुआ ? यदि मेरा घर रिक्थ करवाना था तो मुझे सूचना दी जाती !’
आपको बता दें कि इससे पूर्व भी पाकिस्तानमें सिखोंके साथ दुर्व्यवहारके समाचार आए हैं । इसी वर्ष अप्रैलके एक समाचारके अनुसार पाकिस्तानमें एक ‘स्वतन्त्र निगरानी समूह’के विवरणमें अल्पसंख्यकोंपर अत्याचारके प्रकरणसे निटपनेमें विफल रहनेको लेकर पाक शासनकी आलोचना भी की गई थी । ‘पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग’ने ‘स्टेट ऑफ ह्यूमन राइट्स इन २०१७’के वार्षिक विवरणको जारी करने के अवसरपर कहा कि पाकिस्तानमें लोगोंका लुप्त होना जारी है । कई बार वे इसलिए लापता हो जाते हैं कि देशकी शक्तिशाली सेनाकी आलोचना करते हैं या कुछ बार वह निकटवर्ती भारतके साथ अच्छे सम्बन्धोंकी पैरवी करते हैं ।
इसमें कहा गया था कि धार्मिक अल्पसंख्यकोंकी जनसंख्या अल्प हो रही है । पाकिस्तानकी स्वतन्त्रताके समय देशमें अल्पसंख्यकोंकी जनसंख्या २० प्रतिशतसे अधिक थी । १९९८ की जनगणनाके अनुसार यह संख्या अब तीन प्रतिशत है । विवरणमें कहा गया था कि यदि हिन्दुओंके साथ भेदभाव जारी रहा तो भारतमें उनका प्रवास शीघ्र पलायनमें बदल सकता है ।
स्रोत : जी न्यूज
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