जनवरी ४, २०१९
सबरीमाला विवादपर विरोध प्रकट करनेके लिए कांग्रेसी काली पट्टी बांधकर संसद भवन पहुंचे थे, परन्तु संयुक्त प्रगतिशील गठबंधनकी अध्यक्षा सोनिया गांधीने उन्हें ऐसा करनेसे रोक दिया था ! सोनियाके उन्हें मना करनेके पीछे एक विशेष कारण था । वह उस समय बोलीं कि आप लोग स्थानीय राजनीतिको ध्यानमें रखते हुए केरलमें इस चीजको लेकर विरोध जारी रख सकते हैं, परन्तु राष्ट्रीय स्तरपर यह सांसदोंको मन्दिरमें सभी आयुकी महिलाओंके प्रवेशपर विरोध और आपत्ति नहीं करनी चाहिए । कांग्रेस ऐसा दल है, जो कि लैंगिक समानता और महिलाओंके अधिकारोंकी बातें करता है । ऐसेमें राष्ट्रीय स्तरपर उन्हें यह विरोध नहीं करना चाहिए । यह दलके विरुद्ध जा सकता है ।
केरलके प्राचीन सबरीमाला मंदिरमें लगभा ४० वर्षकी दो महिलाएं गत दिवसोंमें ही प्रवेश कर गई थीं । केरल कांग्रेसने इसका प्रखर विरोध किया था । उन्होंने इसके विरुद्ध ‘काला दिवस’का आह्वान किया था, जिसका समर्थन करने कांग्रेसी सांसद बुधवार, २ जनवरी दोपहर बांहपर काली पट्टियां बांध कर सदन पहुंचें ।
मुल्लापल्ली रामचंद्रनने आरोप लगाया कि मन्दिरमें दो महिलाओंका प्रवेश षडयन्त्रका भाग था, जिसे मुख्यमन्त्रीने रचा था । वह इसकेद्वारा हिन्दू वोट बैंकको विभाजित करना चाहते हैं । वहीं, राष्ट्रीय स्तरपर कांग्रेसने सबरीमालापर उच्चतम न्यायालयके निर्णयका समर्थन किया था ।
“कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधीजी बताती है कि कांग्रेस एक विचारधारा है, उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यह विचारधारा क्षेत्र अनुसार वोट पानेके लिए परिवर्तित होती रहती है !! वस्तुतः धर्म विरहित समूची राजनीतिको ही कोढ लग चुका है । राजनेता केवल वोट पानेके लिए ही वक्तव्य देते हैं, बडे-बडे वचन देते हैं, परन्तु बादमें पलट जाते हैं । कांग्रेस केरलमें महिलाओंका मन्दिरमें प्रवेशका विरोध कर रही है, परन्तु सत्तामें आते ही क्या सोनिया गांधी उन्हें महिलाओंके प्रवेशका आदेश नहीं देंगी ? इससे ही इन अवसरवादी राजनेताओंकी सत्यताका बोध होता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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