जम्मू-कश्मीर स्थित रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी घुसपैठियोंके सन्दर्भमें ठोस नीति निश्चित करें !


७ अप्रैल, २०२२
       जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालयने राज्यके गृहसचिवको एक जनहित याचिकाकी सुनवाईके समय आदेश दिया कि आनेवाले ६ सप्ताहमें जम्मू-कश्मीर राज्यमें रहनेवाले रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी घुसपैठियोंको ढूंढकर उनकी सूची बनाए और साथ ही इस सन्दर्भमें ठोस नीति भी निश्चित करे ! अधिवक्ता हुनर गुप्तद्वारा यह याचिका प्रविष्ट की गई है । इस याचिकामें अवकाशप्राप्त न्यायाधीशकी अध्यक्षतामें पूछताछकर राज्यमें घुसे रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी घुसपैठियोंको बाहर निकालनेकी मांग की गई है । अधिवक्ता गुप्तने कहा है कि शासनने उनके लिए कोई ‘शरणार्थी केन्द्र’ नहीं बनाया है और न ही संयुक्त राष्ट्रोंने इस विषयमें शासनको कोई आदेश दिया है । ये घुसपैठिये नागरिकोंके लिए बनी योजनाओंका अनुचित लाभ उठा रहे हैं । शासनद्वारा दी गई जानकारीके अनुसार, राज्यमें १३ सहस्र ४०० रोहिंग्या तथा बांगलादेशी घुसपैठिये हैं । यह संख्या अधिक होनेकी आशंका है ।
     जिस प्रकार उत्तम व परिणामकारक खेतीके लिए खरपतवारको उखाड फेंकना अनिवार्य है; उसी प्रकार राष्ट्रके सर्वाङ्गीण विकासमें घुसपैठियों रूपी खरपतवारको हटाना होगा ही; साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ये कभी न पनपे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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