तमिलनाडुके ‘मिशनरी’ विद्यालयकी प्रताडना तथा धर्मान्तरणके दबावसे त्रस्त होकर छात्राने की आत्महत्या


२१ जनवरी, २०२२
       तमिलनाडुके तंजावुरमें ‘सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल’, तिरुकट्टुपालीमें कक्षा १२ वींकी पढनेवाली हिन्दू छात्राने आत्महत्या की । वास्तवमें उसपर विद्यालयके अधिकारियोंने ईसाई पन्थमें परिवर्तित होनेका दबाव डाला; किन्तु उसने इसका विरोध कर दिया, जिसके पश्चात विद्यालयके अधिकारियोंने उसे प्रताडित करना आरम्भ कर दिया । इस प्रताडनासे त्रस्त होकर छात्राने आत्महत्या कर ली । विद्यालयके अधिकारियोंकी ओरसे उसे कहा गया था कि यदि वह विद्यालयमें पढना चाहती है तो उसे ईसाई पन्थ अपनाना होगा । छात्राके विरोधसे रुष्ट विद्यालय प्रशासनने पोंगल समारोहके लिए उनकी छुट्टीका आवेदन अस्वीकार कर दिया व इस मध्य उससे बलपूर्वक विद्यालयके शौचालयोंकी स्वच्छता, भोजन पकाने और बर्तन धोने जैसे कार्य करनेके लिए विवश किया गया । मृत्यु पूर्व छात्राने राचेल मैरीका भी नाम लिया जिसने कथित रूपसे उसे प्रताडित किया था । ‘हॉस्टल वार्डन’ सगयामरीपर भी आरोप है कि उसने धर्म परिवर्तनके लिए विवश किया था; इसलिए छात्राने कीटनाशकोंका सेवन किया था ।
       घटनाका संज्ञान लेते हुए, विश्व हिन्दू परिषद, हिन्दू मुन्नानी और राजनीतिक संगठन इंदु मक्कल काची जैसे हिन्दू संगठनोंने छात्राको न्याय दिलाने और हिन्दुओंके धर्मान्तरणके विरुद्ध स्वर उठाए हैं ।
       घोर विडम्बना है कि ईसाई मिशनरियोंद्वारा पोषित ईसाई विद्यालयोंको भारतमें स्वतन्त्रता पश्चातसे व्यापक संरक्षण व राज्याश्रय प्रदान किया गया है; जहां आए दिवस छात्रोंको उनकी धार्मिक मान्यताओंको सूक्ष्मतासे हनन करनेका कुकृत्य चलता आ रहा है और अनेकानेक छात्रोंको प्रताडितकर धर्मान्तरित किया जा चुका है; अनेक आत्महत्याके प्रकरण उजागर ही नहीं हो पाते । इन सबके विरुद्ध हिन्दू समाजको सचेत होना चाहिए व सर्वदलीय राज्यकर्ताओंको ऐसे विद्यालयोंके विरुद्ध कठोरतम करवाईकर प्रतिबन्धित करना चाहिए । सनातन धर्मके मूल्योंसे पोषित गुरुकुल व्यवस्थाको सर्वत्र पुनः स्थापित करनेके लिए प्रत्येकको हिन्दू राष्ट्र स्थापनार्थ कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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