जुलाई १३, २०१८
अयोध्या विवादपर उच्चतम न्यायालयमें शुक्रवारको सुनवाई हुई । सुनवाईके मध्य ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवनने कहा, “‘शिया वक्फ बोर्ड’का इस प्रकरणमें बोलनेका अधिकार नहीं है । राजीव धवनने आगे कहा, जैसे तालिबानने बामियानको नष्ट कर दिया था, ठीक उसी तरह ‘हिन्दू तालिबान’ने बाबरी मस्जिदको नष्ट कर दिया !”
बता दें, ‘शिया वक्फ बोर्ड’ने उच्चतम न्यायालयमें याचिकाकी थी कि वो इस विवादको शान्तिसे सुलझाना चाहते हैं । ‘शिया वक्फ बोर्ड’ने कहा था कि बाबरी मस्जिदका संरक्षक ‘शिया’ है, साथ ही ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’ या अन्य कोई भारतमें मुसलमानोंका प्रतिनिधित्व नहीं करते ।
इससे पूर्व ‘शिया उत्तरप्रदेश सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड’के अधिकारी वसीम रिजवीने कहा, “अयोध्यामें उस स्थानपर कभी मस्जिद नहीं थी और वहां कभी मस्जिद नहीं हो सकती है । यह भगवान रामका जन्मस्थान है और वहां केवल राम मन्दिर बनाया जाएगा ! बाबरसे सहानुभूति रखने वालोंकी नियतिमें पराजय है ।’
बता दें, गत सुनवाईमें वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवनने कहा था कि, ‘इस्लाममें मस्जिदका स्थान है और यह सामूहिकता वाला धर्म है । इस्लाममें ‘नमाज’ कहीं भी की जा सकती है । ‘सामूहिक नमाज’ मस्जिदमें होती है । मस्जिद कोई मजाकके लिए नहीं बनाई गई थी, सहस्त्रों लोग यहां नमाज पढते करते हैं ।’
आपको बता दें कि यह विवाद लगभग ६८ वर्षोंसे न्यायालयमें है । इस प्रकरणसे सम्बन्धित ९००० पृष्ठके लिखित-पत्र और ९० सहस्त्र पृष्ठोंमें अंकित साक्ष्य पाली, फारसी, संस्कृत और अरबी सहित विभिन्न भाषाओंमें हैं, जिसपर ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’ने न्यायालयसे इन लिखित-पत्रोंको अनुवाद करानेकी मांगकी थी ।
२०१० में इलाहाबाद उच्च न्यायालयने इस प्रकरणपर निर्णय देते हुए २.७७ एकडकी विवादित भूमिका एक तिहाई भाग हिन्दू, एक तिहाई मुस्लिम और एक तिहाई ‘राम लला’को दिया था । उच्च न्यायालयने संविधान पीठके १९९४ के निर्णयपर विश्वास किया और हिंदुओंके अधिकारको मान्यता दी ।
स्रोत : आजतक
Leave a Reply