२ वर्ष मन्त्रीकी चाकरी, सेवानिवृत्ति वेतन जीवनभर, केरलकी विजयन शासनको उच्चतम न्यायालयने प्रताडित करते हुए कहा, “आपके राज्यमे बहुत धन है !”
१५ मार्च, २०२२
उच्चतम न्यायालयने सोमवार, १४ मार्च २०२२ को केरलकी पिनराई विजयन शासनको दुत्कारा है । न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारीकी पीठने बताया कि कैसे राज्य २ वर्षकी सेवावाले मन्त्रियोंद्वारा नियुक्त निजी कर्मचारियोंके लिए आजीवन सेवानिवृत्ति वेतनका भुगतान कर रहा है ?
‘बार एंड बेंच’के प्रतिवेदनके अनुसार, उच्चतम न्यायालय केरल राज्य सडक परिवहन निगमद्वारा थोक क्रेताओंसे राज्यके स्वामित्ववाली तेल विपणन ‘कम्पनियों’द्वारा डीजलके लिए लगाए गए मूल्यको चुनौती देनेवाली याचिकापर विचार करनेसे निषेध करते हुए यह टिप्पणी की । केरलकी ओरसे प्रस्तुत हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरिसे न्यायालयने कहा, “आज हमने ‘इंडियन एक्सप्रेस’में पढा है । आप एकमात्र राज्य है, जहां लोगोंको २ वर्षके लिए नियुक्त किया जाता है और उन्हें आजीवन सेवानिवृत्ति वेतन दिया जाता है । राज्यके पास बहुत धन है, यह अधिकारियोंको बताएं !”
‘इंडियन एक्सपप्रेस’के प्रतिवेदनके अनुसार, ‘केएसआरटीसी’की ओरसे प्रस्तुत वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरिने उत्तर दिया कि वह शीर्ष न्यायालयकी चिन्ताओंसे शासनको अवगत कराएंगे । वहीं न्यायमूर्ति नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी सहित दो न्यायाधीशोंकी पीठने याचिकाकर्ताको ईंधनके मूल्यके प्रकरणपर केरल उच्च न्यायालयका द्वार खटखटानेकी स्वतन्त्रता दी ।
विदित हो कि सोमवारको, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ने केरलके राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खानके साथ ५ मार्च २०२२ को, ‘ऑनलाइन’ आयोजित ‘विचार आदान-प्रदान समारोहमें हुई बातचीतपर प्रतिवेदन प्रकाशित किया था । बातचीतके मध्य, खानसे पूछा गया था, “आपने कुछ समय पूर्व सेवानिवृत्ति वेतनपर प्रश्न उठाया था, जिसके केरलमें मन्त्रियोंके निजी कर्मचारी ‘भागीदार’ हैं । वहीं विपक्ष भी एकजुट होता दृष्टिगत हो रहा है ।
केरलके राज्यपाल आरिफ मोहम्म्द अभिनन्दनके पात्र हैं; जिन्होने इस अपव्ययका संज्ञान लिया और प्रकाशमें लाए । यह लोकोक्ति है कि ‘अन्धा बांटे रेवडी अपने-अपने को दे’, यह केरल शासनपर पूर्णतः उचित लागू होती है । जिस देशमें वृत्तिहीनता (बेरोजगारी) अपने उच्चतम स्तरपर हो और युवा वृत्तिहीनता भत्तेके लिए भटक रहे हों, वहां इस प्रकारसे सेवानिवृत्ति वेतन देना नैतिकताकी सभी मर्यादाओंको लांघता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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