समाजमें जातिगत विषमताओंको दूर करनेके स्थानपर आजके सत्तालोलुप नेता, उसे और बढा रहे हैं, इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें राष्ट्रहित और समाजहितकी चिन्ता नहीं है, मात्र अपने सत्ताको पानेकी या बनाए रखनेकी चिन्ता है ! ऐसे स्वार्थान्ध नेताओंसे हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी कल्पना करना भी व्यर्थ है !
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