वर्तमान कालमें चाय या कॉफीका सेवन सामान्य बात है; किन्तु आपको बता दें ये दोनों ही तीन चार शताब्दियोंसे भारतमें प्रचलित हुए हैं एवं विदेशी होनेके कारण यह भारत जैसे देशके लिए अनुकूल पेय नहीं है; इसलिए यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो चाय-कॉफीका कमसे कम सेवन करें ! चाय-कॉफीका सेवन क्यों नहीं करना चाहिए ? इस हेतु निम्नलिखित तथ्योंको ध्यानसे पढें :-
* चाय-कॉफीमें टेनिन नामक अनेक विष होते हैं, जो उदरमें पित्तके तत्त्वको बढाकर छाले उत्पन्न करते हैं ।
* चाय-कॉफीमें कैफीन होता है । इसकी मात्रा २.७५% तक होती है जो शरीरमें अम्लका निर्माण करता है, जिससे ‘किडनी’पर विपरीत प्रभाव पडता है और उसके संचालनको प्रभावित करता है ।
* इसमें कार्बनिक अम्ल अधिक होता है; इसलिए इसका अधिक सेवन करनेवालोंको अम्लपित्त (एसिडिटीकी) समस्या भविष्यमें हो जाती है और प्रातः उठते हे बिना कुछ अल्पाहार किए चाय पीना अर्थात अस्सी प्रकारके रोगोंको न्योता देने समान है ।
* शोधसे ज्ञात हुआ है कि चाय-कॉफीमें ‘वॉलाटाइल’ एवं ‘एरोमोलिक’ नामके रासायनिक द्रव्य होते हैं जो आंतोंको अशक्त करते हैं ।
* कुछ लोगोंको लगता है कि चाय-कॉफीसे भोजन सरलतासे पच जाता है; किन्तु ऐसा नहीं है ।
चाय-कॉफीमें ‘पैमिन’ नामक रसायन पाया जाता है, जो पाचन तन्त्रको अशक्त करता है ।
* एक शोधमें पाया गया है कि चाय-कॉफीका अधिक मात्रामें सेवन करनेवालोंको नपुंसकताका संकट बढ जाता है; क्योंकि इसमें ‘स्टिनॉइल’ नामक तत्त्व पाया जाता है जो नपुंसकता उत्पन्न करता है ।
* अत्यधिक उष्ण चाय-कॉफी पीनेसे कर्करोगकी आशंका अत्यधिक बढ जाती है ।
एक सरलसा सिद्धान्त ध्यानमें रखें ! यदि शरीरमें पित्तकी वृद्धि होगी तो आपको निश्चित ही अनेक प्रकारके रोग होने और चाय-कॉफीके सेवनसे शरीरमें अम्लीय तत्त्वमें वृद्धि होती है । अब आपको समझमें आ रहा होगा कि आज अधिकांश लोग अस्वस्थ क्यों रहते हैं ?
यदि आपको चाय ही पीना हो तो आप अनेक प्रकारकी ऋतु अनुरूप परम्परागत पेय या आयुर्वेदिक काढे हैं, उनका सेवन करें इससे आप स्वस्थ रहंगे ।
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