आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें (भाग – २४.३)


कल हमने टमाटरके विषयमें व इसके कुछ स्वास्थ्य लाभके विषयमें जाना था । आज हम टमाटरसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें बताएंगें –
* मुक्त कणोंसे (free radicals) रक्षा – टमाटरमें विद्यमान ‘लाइकोपीन’ और ‘जीएक्सैंथिन’ जैसे कुछ ‘फ्लैवोनॉयड’ आक्सीकरणरोधी तत्त्व शरीरकी मुक्त कणोंसे रक्षा करते हैं ।
* रक्तवसामें – टमाटरमें वसा नहीं होती है अपितु इसके बीजोंमें ‘फाइबर’ अधिक मात्रामें होता है; अतः यह रक्तवसाको (कोलेस्ट्रॉलको) न्यून करनेके लिए जाना जाता है ।
* प्रतिरक्षा आहार – टमाटरको प्रतिरक्षा बढानेवाले आहारके रूपमें भी माना गया है । यह विशेषतया पुरुषोंकी सामान्य शीतप्रकोप और ‘इन्फ्लूएंजा’से रक्षा करता है । इसमें ‘लाइकोपीन’ और ‘बीटा कैरोटीन’ जैसे आक्सीकरणरोधी तत्त्व होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणालीको सुदृढ करनेमें लाभप्रद हैं ।
* धूम्रपानके धुएंसे रक्षा – टमाटरमें उपस्थित ‘क्यूमरिक अम्ल’ और ‘क्लोरोजेनिक अम्ल’, सिगरेटके धुएंके प्रभावसे शरीरकी रक्षा करते हैं ।
* बच्चोंके विकासके लिए – बच्चोंके मानसिक और शारीरिक विकासके लिए टमाटर अत्यधिक लाभप्रद होता है । यदि पेटमें कृमि (कीडे) हो जाए तो प्रातःकाल खाली पेट टमाटरमें काली मिर्च मिलाकर खानेसे लाभ होता है ।
* गर्भवती महिलाओंके लिए – टमाटरमें प्रचुर मात्रामें ‘विटामिन-सी’ होता है, जो गर्भवती महिलाओंके लिए आवश्यक है । गर्भावस्थामें स्त्रियोंको टमाटरका दो सौ ग्राम रस प्रतिदिन पीना चाहिए, इससे गर्भावस्थामें रक्त अल्पता दूर की जा सकती है ।
सावधानियां – भारतीय व्यंजनोंका एक अभिन्न अंग टमाटर, स्वादके साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है; परन्तु निर्दोष दिखनेवाले इस टमाटरकी कुछ सामान्य और कुछ गम्भीर हानियां भी हैं –
१. टमाटरमें ‘लायकोपिन’ नामक एक ‘फाइटोकेमिकल’ पाया जाता है, जिसका अत्यधिक सेवन प्रतिरक्षा प्रणालीके नियमित गतिविधियोंमें हस्तक्षेप कर सकता है और इसे धीमा कर सकता है; परिणामस्वरूप शरीर कई सामान्य सूक्ष्मजीवी (जीवाण्विक) (बैक्टीरियल), कवकीय (फंगल) और वायरल रोगोंसे स्वयंकी रक्षा करनेकी क्षमता खो देता है । इसके अतिरिक्त, यह शारीरिक क्षतिपूर्तिके लिए असमर्थ हो जाता है ।
२. टमाटर अनेक अम्लोंका एक समावेश है, जिसका अत्यधिक सेवन जठरान्त्र विकारोंको उत्पन्न कर सकता है ।
३. टमाटरके ‘लाइकोपीन’ घटकके परिणामस्वरूप ‘इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम’ (आई.बीए.स.) जैसे कुछ गम्भीर आंतोंकी समस्याएं हो सकती हैं ।
४. टमाटरके सेवनसे वृक्कमें (किडनीमें) पथरीके निर्माणको प्रोत्साहन मिल सकता है । टमाटरके बीज ‘कैल्शियम’ और ‘ऑक्सालेट’ यौगिकोंमें समृद्ध होते हैं । यदि आप पहलेसे ही गुर्देकी समस्याओंसे ग्रस्त हैं, तो इसका सेवन न करें ।
५. अध्ययनोंसे ज्ञात हुआ है कि टमाटरके बीजमें विद्यमान ‘लाइकोपीन’ पुरुष पौरुष ग्रन्थिमें असामान्यताएं उत्पन्न कर सकता है । यह वेदना, मूत्रमें कठिनाई और स्तम्भन दोष आदिका कारक है ।
६. टमाटरका अत्यधिक सेवन करनेसे शरीरसे दुर्गन्ध तक आ सकती है ! टमाटरमें ‘टरपीन्स’ नामक एक तत्त्व पाया जाता है । पाचन क्रियाके समय जब यह तत्त्व टूटता है, तब तनकी दुर्गन्धका कारण बनता है ।
७. टमाटरका लम्बी अवधिके लिए निरन्तर सेवनसे त्वचाका वर्ण (रंग) परिवर्तन हो सकता है ।
दुष्प्रभावोंकी कोई भी मात्रा आपको टमाटरसे दूर नहीं रखेगी; परन्तु इन दुष्प्रभावोंको ध्यानमें रखनेका प्रयास करें और टमाटरकी मात्राको सीमित करें !



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