मद्रास उच्च न्यायालयका प्रश्न, पूछा, “तमिलनाडुमें हिन्दीको तीसरी भाषाके रूपमें सिखाया, तो क्या समस्या है ?”


२७ जनवरी, २०२२
चेन्नईके मद्रास उच्च न्यायालयने एक जनहित याचिकापर सुनवाईके समय कहा, “राज्यमें पूर्वसे ही तमिल और अंग्रेजी पढाई जा रही है । विद्यालय पाठ्यक्रममें तीसरी भाषाके रूपमें हिन्दीका समावेश करनेमें क्या समस्या है ? यदि किसीको हिन्दी नहीं आती होगी, तो उसे उत्तरभारतमें चाकरी मिलनेमें अनेक समस्याएं आ सकती हैं ।” ऐसा कहते हुए मद्रास उच्च न्यायालयने सम्बन्धित संस्थाओंको ८ सप्ताहमें इस विषयपर उत्तर देनेके लिए कहा है ।
इस समय महाधिवक्ता आर. षण्मुगासुंदरमने राज्य शासनकी ओरसे बोलते हुए कहा, “राज्यका प्रत्येक व्यक्ति हिन्दी सीखनेके लिए स्वतन्त्र है । हिन्दी सिखानेवाली संस्थाओंकी ओरसे हिन्दी सीख सकते हैं ।” इसपर न्यायालयने कहा कि ‘सीखना’ और ‘सिखाने’में अन्तर है ।
        जिस देशमें हिन्दीको राष्ट्रभाषा बनानेपर समर्थन मिलना चाहिए, उसी देशमें उच्च न्यायलयद्वारा इस प्रकारका वक्तव्य देना चिन्ताका विषय है; अतः हिन्दी भाषाको लेकर समाजमें जनजाग्रति अभियान चलाया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution