स्टालिन शासनने रोकी ५०० वर्ष पुरातन शोभा यात्रा तो साधु-सन्तोंने ‘धर्मद्रोहियों’को चेताया और कहा, “अंग्रेजोंने भी नहीं किया ऐसा, ये हिन्दू विरोधी निर्णय”
४ मई, २०२२
तमिलनाडुके मदुरैमें एक बडा विवाद छिड गया, जब मयिलादुथुराई जनपदाधिकारीने ‘पट्टिना प्रवेशम’के पारम्परिक अनुष्ठानको आयोजित करनेकी अनुमति देनेसे मना कर दिया । भक्तोंकी परम्परा, धर्मपुरम अधीनमके द्रष्टाको पालकीमें बिठाकर कन्धोंपर ले जानेकी है । वास्तवमें, शैव मठके महन्तको पालकीमें बैठाकर कन्धोंपर ले जानेकी परम्परापर मयिलादुथुराई ‘कलक्ट्रेट’ने मानवाधिकारोंका ‘हवाला’ देकर रोक लगा दी है ।
मदुरै अधीनमके प्रमुख हरिहर ज्ञानसंबंदा स्वामीगलने कहा, “धर्मपुरम अधीनम ५०० वर्ष पुरातन है और गत ५०० वर्षसे यह (पट्टिना प्रवेशम) चल रहा था । इस वर्ष अकस्मात ऐसा नहीं हो रहा है, मुझे दुख हो रहा है । यहांतक कि अंग्रेजोंने पट्टिना प्रवेशमकी अनुमति दी थी ।”
वहीं, वैष्णव गुरु मन्नारगुडी श्री सेंडलंगरा जीयरका कहना है, “पट्टिना प्रवेशम एक धार्मिक अनुष्ठान है । इसे रोकनेका अधिकार किसीको नहीं है । यह मठके अनुयायियोंद्वारा किया जाता है । मैं, मन्नारगुडी जीयरके रूपमें इन ‘धर्मद्रोही’ और ‘देशद्रोही’को उनके हिन्दू विरोधी कार्योंके लिए चेतावनी देता हूं ।”
वहीं, अब इस घटनामें मुख्यमन्त्री एमके स्टालिनसे हस्तक्षेप देनेकी मांगकी गई है ।
जब-जब शासनने धर्मके विरुद्ध पग उठाया है; ऐसे शासनका शीघ्र ही पतन हुआ है । इतिहास साक्षी है, सन्तोंके कोपसे कोई भी धर्मद्रोही शासनकर्ता नहीं बचा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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