तमिलनाडुके स्टालिन शासनने मन्दिरोंके दस सहस्र कोटि (करोड) रुपएके सोनेको पिघालनेकी बनाई योजना, विरोधमें उतरे हिन्दूनिष्ठ


२१ अक्टूबर, २०२१
 तमिलनाडुमें मुख्यमन्त्री एमके स्टालिनके शासनने राज्यके मन्दिरोंका सोना पिघलानेकी योजना बनाई है । सोनेको पिघलाकर २४ ‘कैरेट’के ‘गोल्ड बार्स’ बनाए जाएंगे । राज्य शासनके अनुसार, मन्दिरोंके नियन्त्रणमें सोनेका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा । सबसे पूर्व तिरुवरकाडुके श्रीकुमारी अम्मन मन्दिर, समयपुरमके मरियम्मन मन्दिर और ईरुक्कनकुडीके मरियम्मन मन्दिरपर शासनकी दृष्टि है । तमिलनाडु शासनद्वारा सोनाको पिघलाकर ‘बिस्किट’ बनाकर, उन्हें राष्ट्रीय ‘बैंकों’में जमा किया जाएगा और उससे जो लाभ आएगा, उसका प्रयोग ‘स्टेट हिन्दू चैरिटेबल एंड रिलीजियस एंडोमेंट्स (HR & CE)’ विभागद्वारा मन्दिरोंके विकासमें किया जाएगा । राज्य शासन उन श्रद्धालुओंद्वारा दानमें दिए गए केवल उन्हीं आभूषणोंको पिघलाएगी, जिनका पिछले दस वर्षोंसे प्रयोग नहीं हुआ है । स्टालिन शासनने कहा है कि ये योजना नूतन नहीं है । तमिलनाडु शासनने मद्रास उच्च न्यायालयमें एक सुनवाईके मध्य कहा कि पिछले ४४ वर्षोंसे ये योजना चली आ रही है । अबतक मन्दिरोंमें रखे ५०० किलो सोनेको पिघलाकर अधिकोषोंमें (बैंकोंमें) सङ्ग्रहित किया गया है और इससे राज्य शासनको ‘ब्याज’के रूपमें ११ कोटि (करोड) रुपए लाभ प्राप्त हुआ है । शासनने अब २१३७ किलो सोनेको पिघलानेका निर्णय लिया है । इसके विरोधमें न्यायालयमें याचिकाएं प्रविष्ट की गईं हैं और कहा गया है कि ये प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है; क्योंकि ये आभूषण मन्दिरोंके हैं और भक्तोंने इन्हें दानमें दिया है; इसीलिए शासनको इन्हें छूनेका कोई अधिकार नहीं है ।
     धर्मद्रोही शासन अब धर्मस्थल बनानेके स्थानपर, बने बनाए धर्मस्थलोंको अप्रत्यक्ष रूपसे निगलनेकी योजनाएं बना रहे हैं । उन धर्मद्रोहियोंमेंसे तमिलनाडुका भी एक शासन है, जो मन्दिरोंके व्यक्तिगत प्रकरणोंमें हस्तक्षेपकर रहा है; यद्यपि किसी ‘मस्जिद’ या ‘चर्च’की ओर दृष्टि भी नहीं डाल सकते । ऐसे शासनका सभी हिन्दुओंद्वारा बलपूर्वक विरोध करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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