भगवान कृष्णके युवा अवस्थामें थे अनैतिक सम्बन्ध : ‘टीवी शो’में पुनः उगली गई हिन्दू देवताओंके लिए घृणा, ‘हिन्दूफोबिक’ प्रदर्शनका खुलकर बचाव
०४ जून, २०२२
आए दिन लगभग प्रतिदिन सामाजिक जालस्थल, ‘टीवी’ और विभिन्न मंचपर हिन्दूधर्मके देवी-देवताओंका परिहास उडाया जाता है । ऐसा ही एक प्रकरण पुनः देखनेको मिला है । जहां तमिलनाडुके विदुथलाई चिरुथैगल काची दलके प्रवक्ता विक्रमनने भगवान कृष्णको लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की । उन्होंने गत दिनों उनकी दलीय कार्यकर्ताओंद्वारा मदुरईमें की गई ‘रैली’में हिन्दू विरोधी उद्घोषका बचाव करते हुए अपनी टिप्पणी की । इस ‘रैली’में पूछा गया था कि अन्ततः कृष्णा और अयप्पा भगवान कैसे हो सकते हैं ?
‘टाइम्स नॉउ’पर वाद-विवादके समय उन्होंने भगवान कृष्णपर गोपियोंसे अनैतिक सम्बन्ध रखनेका आरोप लगाया । विक्रमनने कहा, “कृष्णका युवा अवस्था वृंदावनकी महिलाओंके साथ अनैतिक प्रेमसम्बन्धोंसे भरा हुआ था । इसे रासलीला कहा गया । इस मध्य उन्होंने पुराणका सन्दर्भ दिया ।
हिन्दू कार्यकर्ता राहुल ईश्वरने इसपर दु:ख और आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस प्रकारसे किसीके भगवानका अपमान नहीं कर सकते । उन्होंने कहा कि पुराण एक प्रतीकात्मक वर्णन है । उसे वैसे ही नहीं लिया जा सकता, जैसे कि इसमें कहा गया कि रावणके दस सिर थे । इसका मतलब यह नहीं हुआ कि उसके वास्तविकतामें दस सिर थे । इसका अर्थ यह होता है कि उसके पास दस सिरके बरारबर बुद्धिमत्ता थी । इससे यह दिखानेका प्रयास किया गया था कि वह बहुत विद्वान था ।
ज्ञातव्य हो कि गत दिनों गुजरातके वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालयमें ‘फाइन आर्ट फैकेल्टी’एक प्रदर्शनीमें कुछ छात्रोंद्वारा लगाई गई हिन्दू देवी-देवताओंके छायाचित्र आपत्तिजनक थे । प्रदर्शनीमें हिन्दू देवी-देवताओं और भारतके कुछ राष्ट्रीय प्रतीकोंके छायाचित्रोंको दुराचारके प्रकरणोंसे जोडा गया था । इतना ही नहीं, हिन्दू देवी और देवताओंके छायाचित्र बनानेके लिए उन समाचारपत्रोंका प्रयोग किया गया था, जिनपर दुराचारके समाचार प्रकाशित हुए थे ।
विधर्मी वामपन्थी और इस विचारधारासे प्रभावित अन्य लोग ‘हिन्दूफोबिया’से पीडित हैं । यह लोग हिन्दू सभ्यता और मान्यताको नीचा दिखानाका कोई भी अवसर छोडते नहीं है; इसीलिए इस प्रकारकी अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं । इन्हें कठोर दण्ड मिले इसके लिए ऐसे लोगोंके विरुद्ध धार्मिक भवनाओंको आहत करनेके लिए अभियोग चलाया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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