ताम्र जलको ग्रहण करनेसे स्वास्थ्य लाभके साथ ही कुछ रोगोंका निवारण करनेमें सहायता मिलती है |
मानव सभ्यताके इतिहासमें ताम्बेका एक प्रमुख स्थान है; क्योंकि प्राचीन कालमें मानवद्वारा सबसे पहले प्रयुक्त धातुओं और मिश्रधातुओंमें तांबा और कांसेका (जो कि तांबे और टिनसे मिलकर बनता है) नाम आता है ।
तांबेके पात्रोंमें रखे जल अर्थात ताम्र जलको पीनेकी परंपरा हमारे देशमें पुरातन कालसे चली आ रही है | इसके पीछे वैज्ञानिक आधार भी है | आयुर्वेद अनुसार यदि आठ घंटे तांबेके पात्रमें रखा हुआ जल सवेरेमें खाली पेट पिया जाये, तो यह स्वास्थ्यके लिए उत्तम होता है | इससे तीनों दोषोंसे (वात, पित्त और कफसे) सम्बन्धित कष्ट न्यून हो जाते हैं क्योंकि ताम्बा जलको धनात्मक विद्युतसे आवेशित (Positively Charged) कर देता है और शरीरके इन तीनों दोषोंको संतुलित करता है । | मात्र यह ध्यान रखना चाहिए कि न्यूनतम ८ घंटे जलको ताम्र पात्रमें रखनेके पश्चात ही उसे पीना चाहिये; यह सामान्यतः जलसे अभिक्रिया नहीं करता है; परन्तु वायव्य जारकसे धीरे धीरे संयोग कर ऑक्साईड बनाता है जिससे ताम्बेके सर्व सकारात्मक गुण जलमें धीरे-धीरे घुलते रहते हैं | विशेष बात यह है कि ताम्बेके पात्रमें रखा जल हम लम्बे समय तक उपयोग कर सकते है; क्योंकि इससे कोई अशुद्धि और बांसीपन नहीं आता | मात्र यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारा शरीर ताम्बा सहज रूपसे ग्रहण नहीं कर पाता है; इसीलिये इसका अत्यधिक प्रयोग हानिकारक है, फुड आंड ड्रग आड्मिनिस्ट्रेशनके (FDA) अनुसार १२ मिली ग्राम /प्रतिदिन ताम्बेकी मात्रा हमारे शरीरके लिये पर्याप्त है; अतः दिनमें २ से ३ बार ताम्र जलका सेवन शरीर और स्वास्थ्यके लिये उपयुक्त है | ताम्र पात्रको अधिक खुरदुरे पदार्थसे रगड कर स्वच्छ नहीं करना चाहिए अन्यथा ताम्बेकी मात्रामें क्षरण होगा और शीघ्र ही पात्रसे ताम्बा लुप्त हो जायेगा | इस हेतु आप नींबूका उपयोग कर सकते है | नींबूका एक टुकडा लेकर, इसे ठीकसे पात्रमें निचोडकर कुछ देरके लिये छोड दें तत्पश्चात पुनः स्वच्छ जलसे इसे धो ले | खानेका सोडा, एक दूसरा विकल्प है आप इसका भी प्रयोग कर सकते है |
इस जलको पीनेसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं –
१. शीघ्र घावको भरना सम्भव : इसमें एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं | इस कारण इसके प्रयोगसे घाव शीघ्र भर जाते हैं | यह प्रतिरक्षा प्रणालीको (इम्यून सिस्टमको) भी सुदृढ बनानेका कार्य करता है | यह पेटके भीतरके घावोंको भरनेमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |
२. रक्ताल्पताको (एनीमियाको) करे दूर : शरीरकी अधिकतर प्रक्रियाओंमें तांबेकी आवश्यकता पडती है | यह लोहेके अवशोषणमें भी मुख्य भूमिका निभाता है | यही कारण है कि यह रक्ताल्पताको भी दूर करनेमें मुख्य भूमिका निभाता है | यह शरीर और वाहिकाओंमें (वेसेल्समें) लोहेके स्तरको सामान्य रखता है |
३. त्वचाके स्वास्थ्यको रखे उत्तम : तांबा मेलानिनके उत्पादनमें मुख्य भूमिका निभाता है | यह त्वचाको सूर्यके प्रकाशसे होनेवाले हानिसे बचाता है | इसके कारण त्वचाकी अन्य समस्याएं भी दूर होती है जिससे त्वचा कान्तियुक्त और निरोग दिखती है |
४. पाचन तंत्रको करता है सुदृढ : तांबा पेटमें उपस्थित कई हानिकारक जीवाणुको (बैक्टीरियाको) नष्ट करता है. इससे अल्सर, अपच और संक्रमणके कष्ट दूर होते हैं, यह पेटसे विषैले तत्वको निकाल देता है, इससे यकृत(लिवर) और वृक्क (किडनी) योग्य प्रकारसे कार्य करते हैं और शरीरसे व्यर्थ पदार्थोंको अच्छे-से बाहर निकालता है | इससे शरीर पोषक तत्वोंको भी यथोचित रीतिसे अवशोषित कर पाता है |
५. भार(वजन) घटानेमें सहायक : यदि रेशायुक्त (फाइबरयुक्त) पदार्थ खानेके पश्चात भी भार कम नहीं हो रहा है, तो ऐसे में ताम्रजलके प्रयोगसे लाभ मिलता है; क्योंकि इस जलसे पाचन तंत्र सुदृढ होता है और वसा(फैट) सरलतासे टूटता है | शरीर मात्र उन्हीं पदार्थोंको अवशोषित करता है जिनकी आवश्यकता होती है शेष अनावश्यक पदार्थोंको शरीर बाहर निकाल देता है, इससे भार अपने आप घट जाता है.
६. हृदय रोग व उच्च रक्तचापको रखे दूर : ताम्रजल हृदय रोगोंपर नियंत्रण करनेमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | अमेरिकन कैंसर सोसाइटीके एक शोधके अनुसार तांबा उच्च रक्तचाप, तेज धडकन, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइडके स्तरको न्यून करनेमें सहायक है | यह अवरोधको दूर करता है, इससे हृदयतक रक्त सरलतासे पहुंचता है और रक्त संचरण सुधरता है |
७. आधुनिक वैज्ञानिकोंने ये भी पाया है कि तम्बा एक मुख्य खनिज पदार्थ है जो अवटुग्रन्थिको (थायरोइड ग्लैंडको) सुचारू रूपसे कार्य करनेमें सहायता करती है |
Very informative.