देवालयोंका प्रकरण न्यायालय जाता है, तो मुसलमानोंका प्रकरण ‘वक्फ समिति’में क्यों ? – विश्व हिन्दू परिषद


७ फरवरी, २०२२
भागलपुरमें विश्व हिन्दू परिषदके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. आर. एन. सिंहने भागलपुरके आनन्दाराम ढांढनियां सरस्वुती विद्या मन्दिरमें एक संवाददाता सम्मेलनकर कहा, “धर्मान्तरण रोकनेके लिए व्यापक विधान बनें ! दीन एवं अशिक्षित लोगोंको प्रलोभन देकर धर्मान्तरण किया जा रहा है । अनुसूचित जनजातिके लोगोंका धर्मान्तरण किया जा रहा है । इनका धर्मान्तरण होनेके पश्चात भी अनुसूचित जनजातिको लाभ मिलता है । इन्हें मिलनेवाली सुविधाओंको बन्द किया जाना चाहिए । मठ-मन्दिरोंको होनेवाली आयको शासन ‘मदरसा’ एवं ‘चर्च’पर व्यय कर रही है ।
उन्होंने आगे कहा, “मठ-मन्दिरोंपर शासनका आधिपत्य है । मठ-मन्दिरोंकी आयको शासन ले रहा है । इससे मठ-मन्दिरोंकी स्थिति बिगडती जा रही है ।  मठ-मन्दिरोंकी आयको स्थानीय स्तरपर व्यय किया जाए । समिति बनाकर आयका उपयोग किया जाए । राष्ट्रमें मुसलमान तुष्टीकरणका खेल चल रहा है । मठ-मन्दिरोंका प्रकरण न्यायालयमें जाता है, जबकि ‘वक्फ’ समितिका प्रकरण ‘वक्फ’ समितिमें जाता है । इससे सम्बन्धित प्रकरणोंकी सुनवाई न्यायालयमें नहीं होती है । इससे अनेक हिन्दुओंकी सम्पत्ति ‘वक्फ’ समितिमें चली गई है ।
      मठ-मन्दिरोकी सम्पत्तिका उपयोग जब ‘मदरसों’में एवं ‘चर्च’में होता है, तो उसका उपयोग वहांके विकास हेतु नहीं; अपितु धर्मान्तरण एवं आतङ्क फैलानेवाली राष्ट्र और हिन्दू धर्म विरोधी गतिविधियोंमें होता है । केन्द्रीय शासन इस सन्दर्भ शीघ्र क्रियाशील होकर विधान लाए तथा साथ ही मठ-मन्दिरोंका शासकीयकरण समाप्तकर इनका व्यवस्थापन हिन्दुओंको प्रदान करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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