हिन्दी सुनकर भडके कांग्रेस सांसद शशि थरूर, केन्द्रीय मन्त्री ज्योतिरादित्य सिंधियाको कहा, “लोगोंका अपमान हुआ”


४ फरवरी, २०२२
हिन्दी और आंग्ल (अंग्रेजी) भाषाको लेकर दो पूर्व सहयोगियोंके मध्य गुरुवारको (३ फरवरी २०२२ को) लोकसभामें कार्यवाहीके मध्य वाद-विवाद हो गया । संसदमें प्रश्नकालके मध्य आंग्लमें प्रश्न पूछे गए । इसका उत्तर केन्द्रीय उड्डयन मन्त्री ज्योतिरादित्य सिंधियाने हिन्दीमें दिया तो कांग्रेस नेता शशि थरूर भडक गए । वे इसे अपमान बताते हुए रुष्ट हो गए ।
वास्तवमें, पोल्ला्चीसे (तमिलनाडुसे) ‘डीएमके’ सांसद केएस सुंदरमने कोयंबटूरसे ‘इंटरनेशन फ्लाइट’ आरम्भ होनेको लेकर ‘अंग्रेजी’में प्रश्न किया । इसका उत्तर केन्द्रीय मन्त्री ज्योमतिरादित्यस सिंधियाने हिन्दीमें दिया । मध्य प्रदेशके गुनासे लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया उत्तर देकर बैठे ही थे कि केरलके तिरुवनंतपुरमसे कांग्रेसके शशि थरूर उखड गए ।
क्रोधित थरूरने कहा कि कृपया हिन्दीमें उत्तर न दें । यह लोगोंका अपमान है । मन्त्री ‘अंग्रेजी’में बोलते हैं। इसका उत्तर देते हुए सिंधियाने कहा कि सदनके सदस्यके लिए टिप्पणी करना विचित्र बात है । उन्होंने कहा, “मैं हिन्दीमें बोलता हूं तो सदनके सदस्यको आपत्ति है; जबकि सदनमें एक अनुवादक भी है ।”
दोनोंके मध्य चल रहे वाद-विवादको देखते हुए सदनके सभापतिने (स्पीकरने) त्वरित हस्तक्षेप किया । ‘स्पीकर’ ओम बिरलाने कहा कि हिन्दीमें उत्तर देना अपमान नहीं है ।
        कांग्रेस नेता थरूर, कदाचित विस्मरण कर चुके है कि वह भारत देशमें रहते है न कि अमेरिकामें । जिस प्रकार संसदमें शशि थरूरने आंग्ल भाषाका पक्ष लेकर मातृभाषा हिन्दीका और भारत देशका अपमान किया है, यदि ऐसा वक्तव्य उन्होंने पडोसी देश पाकिस्तानमें दिया होता, तो उन्हें ज्ञात होता कि अपमान करना और अपमान होनेमें क्या भेद होता है ? थरूर जैसे नेताका संसदमें होना ही ‘अपमानजनक’ है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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