जनवरी २, २०१९
आप इतिहास भले ही न बना पाएं; परन्तु उसे मनमाने ढंगसे गढकर परोस अवश्य सकते हैं । सत्तामें रहते भारतके राजनीतिक दल अपनी विचारधाराके छाप-तिलक अमिट बनाए रखनेकी वृत्तिसे ऐसी रणनीतिपर विचार करते आए हैं । मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढमें नव-निर्वाचित कांग्रेसी शासन अपने अनूठे ‘विषहरण’ अभियानपर हैं । ये पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमको पूर्वाग्रहों और पुनरुत्थानवादी हिन्दुत्वसे मुक्त करनेमें लगी हैं !!
पाठचर्याको ‘विषमुक्त’ बनानेकी सबसे अधिक शीघ्रता छत्तीसगढके मुख्यमन्त्री भूपेश बघेलको है । उन्होंने शिक्षामन्त्री प्रेमसाइ सिंह टीकमसे उन पाठ्यपुस्तकोंसे छुटकारा दिलानेके लिए कहा है, जिन्हें तथ्य और सत्यकी अनदेखी करते हुए बहुसंख्यकवादी हिन्दू विश्व-दृष्टिसे लिखा गया है !!
‘बीबीसी वर्ल्ड सर्विस’से जुडेडे पूर्व पत्रकार और मुख्यमन्त्री भूपेश बघेलके राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्माका कहना है, “मुख्यमन्त्री और उनके दलने एक समिति बनानेके लिए देशके विशेषज्ञोंसे सम्पर्क साधना आरम्भ किया है । यह समिति पाठ्यपुस्तकों, पाठयक्रम (सिलेबस) और पाठ्यचर्याका (कुरिकुलम) पुनरावलोकन और समीक्षा करेगी ।” उन्होंने बताया कि हम लोग एक ऐसी पाठ्यचर्या बनाना चाहते हैं, जो पाठको सिखानेके प्रकरणमें ‘प्रोफेसर यशपाल समिति’के विचारसे मेल खाए ।
वर्माका कहना है कि पाठ्यपुस्तकोंके भगवाकरणके अतिरिक्त रमन सिंहके १५ वर्षोंके शासनमें पाठ्यचर्यामें कई बडी चूकें और विसंगतियां उत्पन्न हो गई हैं । उदाहरणके लिए छत्तीसगढ माध्यमिक शिक्षा बोर्डकी ओरसे प्रकाशित १०वीं कक्षाके समाज विज्ञानकी पाठ्यपुस्तकमें बताया गया है कि देशकी स्वतन्त्रताके पश्चात अधिक संख्यामें महिलाओंने काम करना आरम्भ कर दिया, इस कारण वृत्तिहीनता (बेरोजगारी) बढ गई ।
भूपेश बघेल और विनोद वर्माका कहना है कि आरएसएससे जुडे विद्या भारती जैसे निजी विद्यालयकी अपनी निजी पाठ्यचर्या है । ‘संस्कृति ज्ञान परीक्षा’के अन्तर्गत पढाई जानेवाली पाठ्य-सामग्रीका एक भाग :
प्रश्न) किस मुगल शासकने १५८२ में राममंदिरका विध्वंस किया ?
उत्तर) बाबर
प्रश्न ) ख्रिस्राब्द १५८२ से १९९२ तक कितने रामभक्तोंने मन्दिरकी मुक्तिके लिए अपने जीवनका बलिदान किया ?
उत्तर ) ३,५०,०००
जयपुरमें मुख्यमन्त्री अशोक गहलोतने शिक्षामन्त्री गोविन्द सिंह दोस्तरासे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे राष्ट्रनायकोंकी ‘भूमिका’को बतानेको कहा है ।
बीजेपीके शासनमें रह चुके इन तीन राज्योंमें राजस्थान पुनरुत्थानवादी हिन्दुत्व थोपने और मुस्लिम पहचानको मिटानेके सन्दर्भसे ‘रचनात्मक छूट’ लेनेके विषयमें सबसे उच्च सिद्ध हुआ है । यहां इतिहासकी पाठ्यपुस्तकोंमें पृथ्वीराज चौहानको एक ऐसा राजा बताया गया है, जिसने ‘भारतपर आक्रमण करनेवाले मोहम्मद गोरीको कई सार परास्त किया ।’ वर्ष २०१७ के फरवरीमें, शिक्षामन्त्री वसुदेव देवनानीने एक प्रस्तावका समर्थन किया था । प्रस्ताव यह था कि बच्चोंको वैकल्पिक इतिहास-दृष्टिसे शिक्षा दी जाए । उनका कहना था कि १५७ में हल्दीघाटी युद्धमें महाराणा प्रतापने अकबरको परास्त किया था न कि अकबरने महाराणा प्रतापको, जैसा कि बताया जाता है ।
आठवीं कक्षाकी पुस्तकमें सतीप्रथाका महिमामण्डन किया गया है । राजस्थानकी एक पाठ्यपुस्तकमें ‘सिंधु घाटी सभ्यता’को ‘सिंधु घाटी संस्कृति’ लिखा गया है । आर्योंको भारतका मूलवासी बताया गया है, जबकि प्रसिद्ध इतिहासकारोंका मानना है कि आर्य कहीं बाहरसे चलकर भारत पहुंचे थे । वर्ष २०१६ की मईमें वसुंधरा राजे शासनने आठवीं कक्षाकी पाठ्यपुस्तकसे देशके प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरूका नाम हटा दिया ।
मध्यप्रदेशमें मुख्यमन्त्री कमलनाथ लोकसभा चुनावोंतक गति धीमी रखना चाहते हैं । उन्होंने राज्यके मुख्य सचिव एस आर मोहंतीसे पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमके पुनरावलोकनका आधार तैयार करने और जून-जुलाईसे आरम्भ होनेवाले अकादमिक सत्रसे परिवर्तनको लागू करनेकी बात कही है ।
भोपालके कुछ सूत्रोंका कहना है कि कमलनाथ पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमसे जुडे राजनीतिक रूपसे संवेदनशील प्रकरणपर फूंक-फूंककर पग उठाना चाहते हैं । शिवराज सिंह चौहानके शासनमें बच्चोंको नैतिक मूल्योंकी शिक्षा देनेके लिए पाठ्यचर्यामें ‘गीता-सार’ पढाया जाने लगा । उर्दू माध्यमके विद्यालयकी पुस्तकोंमें गीतापर एक पाठ सम्मिलित किया गया । मुस्लिम और ईसाई धर्मके प्रतिनिधियोंके विरोधके पश्चात शिवराज सिंह चौहानने बाइबिल, कुरान तथा गुरु ग्रन्थसाहिबसे भी पाठोंको सम्मिलित किया । सूत्रोंका कहना है कि अभी लोकसभाके मतदान सिरपर हैं तो ‘गीता-सार’को हटाने या समाप्त करनेका कोई भी प्रयास अपने पांवपर कुल्हाडी मारने जैसा सिद्ध हो सकता है ।
“मुसलमानों और विदेशी महिलाके अधीन कांग्रेस शासनकी सबसे बडी देन जो इस राष्ट्रको है, वह है संस्कृति और इतिहासका नाश ! अब मध्यप्रदेश में इन विषधर सर्पोंको गीतासे समस्या है । मैकॉलेका मानना था कि भारतकी शिक्षाको नष्टकर बालकोंमें ही कुसंस्कार भरो, जिससे ये स्वतः ही नष्ट हो जाए । मैकॉलेकी दी विरासतको कांग्रेसने अच्छे ढंगसे आगे बढाया और संस्कृतिके विनाशमें अपना उल्लेखनीय योगदान दिया और विडम्बना है कि इन निधर्मियोंको हिन्दुओंने पुनः लाकर बैठा दिया । हिन्दुओ ! यह ध्यान रखे कि यदि आपके बालकमें स्वधर्म, राष्ट्रनायकोंके संस्कार नहीं होंगें तो वो भी एक दिन आपको धक्के मारकर घरसे निकालेंगे और ऐसा हो भी क्यो न ? आप घरोंमें धर्म संस्कार देते नहीं और विद्यालयोंमें उसे पढाया जाएगा कि अनेकानेक हिन्दु महिलाओनका दुष्कर्म करनेवाला अकबर महान है तो वह यही सीखेगा ! यदि चाहते हैं ऐसा न हो तो इन निधर्मियोंका मुखर होकर विरोध करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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